Samadhan Episode – 00069 Relationship Problems

CONTENTS :

1 . जो व्यर्थ के ज्यादा शिकार है वही समस्यायों से ज्यादा प्रभावित होते है

2 .  अपने को कहीं ना कहीं बिज़ि अवश्य कर देना चाहिए

3 .  जीवन हार ओर जीत का खेल है

4 . पास्ट के कडवे अनुभव

 

रूपेश भाई ——-> नमस्कार आदाब सत श्री अकाल, मित्रों एक बार पुनः स्वागत है आप सभी का समाधान

कार्यकर्म में जो आपका पसंदीदा कार्यकर्म है| लक्ष्य हमेशा की तरह हम जैसा कहते हैं समाधान आप सभी की

समस्याओं  को दूर करे ओर साथ ही आपके जीवन को खुशहाल बनाए, यही हमारा ध्येय है यही हमारी

शुभकामना है ओर इसी लक्ष्य से हम आपके प्रश्नो को, आपकी समस्याओं को इस कार्यकर्म में शामिल करते हैं

ताकि आप तक

समाधान पहुंचा सके जिन पर अमल करके आप खुशहाली की ओर बढ़े शांति की ओर बढ़े आनंद की ओर बढ़े|

जिसके लिए ईश्वर ने आपको जीवन प्रदान किया है यही इस कार्यकर्म का विशेष ध्येय है लक्ष्य है हमारी मंगल

कामना है ओर इस कार्यकर्म को आगे बढाते हुए आईए स्वागत करते हैं आदरणीय सूर्य भाई जी का जो हमेशा

हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलते हैं मृत्यु से अमरता की ओर ले चलते हैं साथ ही समस्याओं से समाधान

की ओर ले चलते हैं आइये भ्राता जी का स्वागत करते हैं भ्राता जी आपका बहुत-बहुत स्वागत हैं| भ्राता जी जैसा

मैं पिछली बार भी कह रहा था की बहुत सारे मेल हमारे पास आ रहे हैं ओर कार्यकर्म को देखने के पश्चात बहुत

सारे प्रश्नो का उनको समाधान मिलता ही होगा लेकिन अन्य प्रश्न भी जो है उन अपने सगे-सम्बन्धियो से वो चर्चा

करते होंगे तो निरंतर हमारे पास प्रश्न ओर ई-मेल्स आ रहे हैं|

 

सूर्य भाई जी ——-> बिलकुल, मुझे बहुत खुशी होती है, मेरे पास भी रोज कम से कम दो अच्छे न्यूज़ मिलते हैं की

उनकी समस्या इस प्रयोग से बिलकुल हल हो गई है तो बहुत आनंद होता है ओर अपने में भी एक आत्म संतोष

होता है की हम दूसरों को मदद कर पा रहे है जो हमारे जीवन का एक लक्ष्य था तो मैं ये बात कहूँगा मन की

स्थितियों को हम जरा ठीक करे, मन के विचारों को ठीक करे ओर उसमे पहली चीज है इन्हे पॉज़िटिव करना|

देखिये जो लोग ज्यादा निगेटिव हैं जो व्यर्थ के ज्यादा शिकार है वही समस्यायों से ज्यादा प्रभावित होते है जैसे

आँधी चलती है, आँधी में धूल भी उड़ जाती है कंकरे भी उड़ जाती है पक्षी मरने लगते हैं लेकिन जो व्यक्ति अपनी

सुरक्षा करना जानता है वो उससे बिलकुल सेफ रहता है, कभी तेज हवा चलती है जो कमजोर शरीर वाले होते है

उनको बड़ी समस्या होती है ठंडी हवा चल रही है लेकिन जो स्ट्रॉंग शरीर वाले हैं वो उसको एंजॉय करते है कहेंगे

वाह ! शीतल पवन बह रही है आनंद आ रहा है आज तो बाहर| तो अपने दृष्टिकोण को भी हम अच्छा करे अपने

विचारो को भी बहुत शक्तिशाली करे, साथ में मैं ये भी कहूँगा की अगर लगातार जीवन में समस्याएं आ रही है,

ऐसा भी बहुतों के साथ होता है की एक समस्या पूरी होती है दूसरी आ जाती है, वो पूरी होती है तीसरी, चोथी| तो

इससे मनुष्य का मनोबल गिरना बिल्कुल स्वाभाविक सी बात होती है नेचुरली वो डिप्रेश भी हो सकता है ओर वो

अपने जीवन के बारे में बहुत निगेटिव भी हो सकता है की वॉट इज दिस, दिस इज नॉट द लाइफ ओर ऐसा बहुत

से लोग देखते देखते सुसाइड-टेंडल्स की ओर बढ्ने लगते हैं की इससे तो अच्छा है मर जाए हम, हमारे पास कुछ

नहीं है करने को, कोई समाधान हमें दिखाई नहीं देता| लेकिन जीवन में कभी बुरे दिन भी आते हैं चाहे जो लोग

ज्योतिष में विश्वास करते हो या कोई नहीं करते क्योंकि ज्योतिष भी तो एक विज्ञान है पर जो नहीं भी करते वो भी

इस बात के अनुभवी हैं की कभी-कभी जीवन में बुरे दिन आ जाते है, कभी-कभी बहुत मेहनत करने के बाद भी

सफलता मंजिल बहुत दूर दिखाई देती है| बहुत लोगो के मुझे फोन-कॉल आते है उसमे भी युवा कैंडीडेटस के

की सबकुछ अच्छा होता है, एक-एक मार्क से रह गए, इंटरव्यू बहुत फ़र्स्टक्लास हुआ, लगा बस अब एपाइंटमेंट-

लेटर मिलने वाला है, देने वालों ने भी कहा आपको मिलेगा ओर फिर नहीं मिला है तो ऐसे में मनुष्य बहुत निराश

होता है| एक का मुझे फोन आ रहा था की मेरा बच्चा बहुत निराश हो गया है कई जगह इंटरव्यू दिया सबकुछ

फ़र्स्टक्लास होता है लेकिन पता नहीं क्यों अपोइंटमेंट नहीं मिलती है| तो ऐसे में मनुष्य का टूट जाना बिल्कुल

नेचुरल सी प्रवृति है लेकिन हम कहेंगे हमे भगवान में विश्वास रखना चाहिए अपने में विश्वास रखना चाहिए ओर

समय की जो गति है इसमे भी विश्वास रखना चाहिए, समय गतिमान है, जो आज है वो कल नहीं होगा, जो कल था

वो आज नहीं है, समय की धारा निरंतर बदलती जा रही है| तो बैड डेज आए है, गुड डेज आ जाएंगे थोड़ा धैर्यता

से उस बुरे समय को पास कर देना चाहिए कुछ अध्यन के द्वारा अपने को कहीं ना कहीं बिज़ि अवश्य कर देना

चाहिए| मनुष्य क्या करता है की मान लो इंटरव्यूज में सफलता नही मिल रही है तो वो इस निराशा के अंधकार में

अपने विचारो को मलिन करने लगता है ओर वो वही सोचने लगता है मेरा भाग्य पता नहीं कैसा है, मैंने पता नहीं

क्या पापकर्म कर लिए, सब मेरे साथी तो आगे-आगे बढ़ ये दूसरी चीज़ होती है मेरे सब साथी आगे बढ़ गए ओर

मैं ही पता नहीं कैसा दुर्भागा हूँ मैं पीछे रह गया हूँ| इन विचारो से निकलकर की ठीक है दूसरे आगे निकल गए

मेरा भी नंबर आएगा, कहीं ओर अच्छे कार्यो में अपने को बिज़ि कर देना चाहिए तो इससे मानसिक स्थिति

संतुलित रहेगी हमारे विचार बहुत संतुलित रहेगे ओर हम समस्यायों से पार पा सकेंगे|

 

रूपेश भाई ——-> बिलकुल, तो जीवन हार ओर जीत का खेल है, निंदा ओर स्तुति का खेल है हमेशा ये नहीं होगा की

जीत ही जीत होती रहे कभी-कभी हार भी हो जाती है ओर कई बार ज्यादा हार होती रहती है लगातार होती है

लेकिन हम अपने विश्वास को बनाए रखे| जैसे की आपने कहा की आत्मविश्वास यदि है, परमात्मा पर विश्वास यदि

है ओर साथ ही समय पर विश्वास है की आज यदि बुरा दिन है तो निश्चित रूप से एक अच्छा दिन अवश्य आएगा

उसके लिए मैं प्रयासरत रहूं ये ज्यादा इंपोर्टेन्ट है अपने अटीट्यूट को पॉज़िटिव बनाए रखू, अपने चिंतन को

पॉज़िटिव बनाए रखू ये कहीं ज्यादा आवश्यक है|

 

सूर्य भाई जी ——-> इसके साथ-साथ ये भी जरूरी है की जो बड़े है बुजुर्ग, माँ-बाप है उन्हे भी अपने बच्चो को

ऐसे में सहयोग देना चाहिए| वो क्या करते हैं ये बहुतों के साथ हो रहा है की बाप बार-बार कोमेंट्स करेगा तुझे

पढ़ाया-लिखाया, इतना लाख तुम पर खर्च कर दिया| इसमे जो बड़े है, बुजुर्ग है उन्हे उनको पुरोत्साहित करना

चाहिए की

कोई बात नहीं, यहाँ नहीं मिला ओर कहीं मिलेगा, कोई बात नहीं हमारे पास ये काम है ना, ये करो तब तक फिर

इंटरव्यू देना है फिर सफलता हो जाएगी| तो ऐसे बड़ो को भी एक कोपोरेटिव अटीट्यूट अपनाना चाहिए|

 

रूपेश भाई ——-> बिल्कुल, ये बहुत आवश्यक हो जाता है भ्राता जी जब व्यक्ति हार रहा होता है तो किसी का थोड़ा

सा भी प्रोत्साहन, ओर यदि वो माता-पिता है, अपने सगे-संबंधी है, बड़े भाई या बहन है वो कहीं ज्यादा मरहम का

कार्य करते है ओर हमे आगे बढाते है| भ्राता जी अब मैं मेल्स की ओर आता हूं ये हमारे पास प्रथम मेल आया है

चिरकुंडा से सकुन्तला दास जी लिख रही है की मेरा पूरा जीवन संघर्षो में बिता है अब घर की स्थिति अच्छी है

लेकिन पास्ट का प्रभाव अब भी मुझ पर सदा छाया रहता है, पास्ट के कडवे अनुभव मुझे दुखी कर देते है ओर

वर्तमान में सबकुछ ठीक होने के बावजूद मैं उसका सुख नहीं ले पा रही हूं तो मैं क्या करूँ?

 

सूर्य भाई जी ——-> बिल्कुल, सकुन्तला बहन की ये परिस्थिति बहुतों की परिस्थिति है सचमुच कईयों का जीवन

संघर्षमय बन जाता है उन्हे व्यवहार में भी संघर्ष का सामना करना पड़ता है, उन्हे आफ्नो से भी संघर्ष झेलना

पड़ता है ओर कहीं कहीं वो स्वयम भी संघर्ष को क्रिएट कर लेती है जहां जाओ घर में रह रहे थे तो भाई-बहनो से

अच्छी नहीं बनी, माँ ने कुछ कोपरेट नहीं किया, मैरिज हुई ससुराल में आई तो वहाँ भी सास ऐसी मिल गयी वो भी

कोमेंट्स ही करती उसके काम को कभी अपरिसीएट नहीं करती, उसको कभी प्रोत्साहन नहीं दिलाती, जॉब में

गयी तो वहाँ भी साथी ऐसे मिल गए तो एक संघर्ष फिल होता है| तो इनहोने दो बाते पूछी एक तो जीवन संघर्षमय

हो गया है दूसरा इनको पास्ट की बहुत चीजें परेशान कर रही है तो एक तो जीवन में संघर्ष फिल कर रही हैं

इसको इन्हे ठीक करना है की इसको ये संघर्ष ना मानकर अपने ही द्वारा बोये गए बीज का फल इन्हे प्राप्त हो

रहा है| जैसे कबीरदास ने कहा है- बोया पेड़ बबूल का,आम कहाँ ते खाये, तो बीज जब खराब बो दिये थे कुछ

समय पहले पूर्व जन्म में हमने जब दूसरों के मार्ग में कटुता पैदा की थी तब तो हमने नहीं सोचा था ना कुछ, अब

जब दूसरे हमारे मार्ग में कटुता पैदा कर रहे है तो हम उसको फेस नहीं कर पा रहे है इसलिए बी-लाइट , कुछ

चीजों को अकसेप्ट कर लो हल्के हो जाओ ओर इस संघर्ष को बहुत धैर्यता पूर्वक पार करना है पहली चीज तो ये

जरूरी| इसमे हमारा ज्ञान जो ईश्वरीय ज्ञान है वो बहुत मदद करता है, मैंने देखा है ऐसे अनेक केसेज में की लोग

इसी तरह संघर्षमय जीवन जी रहे थे उन्हे ज्ञान मिला की ये संसार तो एक सुंदर नाटक है ओर हम सब तो इसमे

एक्टर्स है ओर एक्टर्स को एक निश्चित पार्ट भी मिला हुआ है| ये वर्ल्ड का ड्रामा एक ड्रामा भी है तो एक सुंदर गेम

भी है इसमे हम खिलाड़ी भी है खेल रहे है कहीं हार है कहीं जीत है| ये सुंदर ड्रामा ऐसा है इसमे कहीं जय है तो

कहीं पराजय भी है, कहीं निंदा है कहीं स्तुति है, कहीं जल्दी सफलता है कहीं नहीं है| एक सा ही हो तो ड्रामा की

ब्युटि समाप्त हो जाएगी इसलिए इसमे वेराइटी का इन सब एक्टर्स है, वेराइटी का पार्ट्स मिले हुये है सबको| तो

जैसे ही उन्होने ये समझा ओर स्वीकार किया चित शांत हो गया की हम तो कुछ ओर सोच रहे थे लेकिन है कुछ

ओर तो इस तरह ईश्वरीय ज्ञान के द्वारा इन्हे भी अपने चित को शांत करना पड़ेगा| सकुन्तला देवी को मैं कहूँगा क

पहले अपने चित को शांत करे, उखाड़ो नहीं ओर इनका चित उखड़ गया है इनकी पास्ट की कुछ घटनाओ से|

देखिये पास्ट एक ऐसी चीज है जिसको बदलने की शक्ति तो किसी में नहीं है कभी-कभी मनुष्य स्वयम भी कोई

बड़ी गलती कर लेता है ओर अपने को क्षमा नहीं कर पाता है ओर ये अपराध बोध, गिल्टी फिलिंग मनुष्य की

खुशी को छिनती रहती है, बहुत बड़ी चीज है लेकिन हमे इसको पार करना है| मैंने ऐसे बहुत सारे केसेज में देखा

मैं उन्हे लाइट करता हूं की अब तो हो गया ना, तुमने ही गलती की है ना ओर तुमने एकसेप्ट कर लिया मुझ से

गलती हुई तो जब मनुष्य अपनी गल्ती को रियलाइज कर लेता है तो उसके ब्रेन में उसकी छपी हुई जो निगेटिव

वेव्ज है वो आधी तो डिलीट हो जाती है| तो आपने रियलाइज कर लिया ना की मुझ से गल्ती हुई अब चित को

शांत कर दो| कुछ लोग ऐसे है जो गल्ती करके अपनी गल्ती को ना रियलाइज करते है ना एकसेप्ट करते है

उनको बहुत कठिनाई होती है भले ही वो सोचे की हम बच निकले, हमने अपने को प्रोटेक्ट कर लिया पर ये

प्रोटेक्सन नहीं है अगर मनुष्य अपनी गल्ती को स्वीकार नहीं करता तो उसकी गल्ती बढ़ती जाएगी ओर कहीं ना

कहीं वो विस्फोटक रूप ले लेगी| तो सकुन्तला ने रियलाइज कर लिया है अपनी उस गल्ती को, एकसेप्ट भी कर

लिया अब अपने को क्षमा कर दे, अपने क्षमा करके अपने चित को शांत करो| यहाँ ये सिद्धान्त है जो अपने को

क्षमा कर देता है उसको भगवान भी क्षमा कर देता है, उसके आगे भी रेकुएस्ट कर दो ये मेरे से ये गल्ती हुई थी,

मैं सच्चे दिल से आपसे क्षमा याचना करती हूं तो भगवान तो क्षमा का सागर है वो भी उन आत्माओ के, उन

मनुष्यो की भूलो को, पापो को क्षमा कर देता है जो रियलाइज कर लेते है ओर जो दुबारा उनको ना करने का

संकल्प कर लेते हैं| ऐसे नहीं की वो बार-बार पाप करते रहे ओर क्षमा याचना करते रहे उससे क्षमा नहीं मिलेगी

लेकिन स्वीकार किया रियलाइज किया आगे के लिय उसमे चेंज ले आये तो सबकुछ ठीक हो जाता है| तो एक तो

इस अपराध बोध से इन्हे मुक्त होना पड़ेगा निश्चित रूप से अपराध बोध इनकी खुशी को छिन रहा है पास्ट को तो

भूलना पड़ेगा क्योंकि वो बीत चुका है|

 

रूपेश भाई ——-> वैसे भी कहा जाता है भ्राता जी की गड़े मुर्दे उखाड़ने से तो अब कोई फायदा नहीं है, जो  चीज़ बीत

गई तो बीत गई, जैसा कि आपने कहा की अपने आप को भी क्षमा कर दे ओर मान लीजिये किसी दूसरे के साथ

कोई घटना हुई है तो उनसे भी क्षमा ले ले, अपने आप को हल्का करे ओर वर्तमान में जिये| गीता में भी ये कहा

गया है कि भूत का पश्चाताप ओर भविष्य कि चिंता ना करके यदि वर्तमान में रहे, वर्तमान में जिये ओर वर्तमान को

श्रेष्ठ बनाए तो निश्चित रूप से उसका सम्पूर्ण आनंद भी ले पाते हैं ओर हमारा जीवन भी खुशहाली से भर जाता है|

 

सूर्य भाई जी ——-> बिलकुल यही होता है देखो गड़े मुर्दे उखाड़ेंगे स्थूल में भी तो बदबू ही बदबू मिलेगी ना ओर तो

कुछ मिलेगा नहीं हड्डियाँ भी गल गई होंगी बॉडी भी मिट्टी में मिल गया होगा बदबू के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा|

पास्ट कि बातों को जितना उखाड़ेंगे वो मन को मैला करेगी लेकिन फिर भी पास्ट कि बाते मनुष्य के वर्तमान को

इफेक्टिव जरूर करती है| हम कह तो देते हैं कि वर्तमान को एंजॉय करो, फॉर गैट द पास्ट, लेकिन ये संभव

मुश्किल होता है इसलिए उसका तरीका है कि सुंदर चिंतन कि ओर स्वयम को ले चले, ईश्वरीय ज्ञान लेकर ज्ञान

का चिंतन करे तो पुरानी चीज़ों को डिलीट करने के लिए हमें नई चिजे प्रिंट करनी ही पड़ेगी, रिकॉर्ड करनी ही

पड़ेगी| तो यही तरीका है की ये ईश्वरीय ज्ञान ले ओर राजयोग का अभ्यास करे ओर ईश्वरीय ज्ञान का चिंतन करे

तो पास्ट का चिंतन स्वत: ही समाप्त हो जाएगा|

 

रूपेश भाई ——-> जी, भ्राता जी ये हमारे पास जो अगला मेल आया है ये आया है बलोदा बाज़ार से सत्यम कोशिक जी

लिख रहे हैं की मेरे पिता जी दस साल से बिस्तर पर है, बिस्तर पर ही उन्हे सारे नित्यकर्म कराये जाते है उनकी

बीमारी भी लाईलाज है उनके इस कंडीसन से घर में एक उदासी का माहोल बना रहता है माँ भी बहुत ज्यादा

उदास रहती है, क्या इसका कोई उपाय हो सकता है?

 

सूर्य भाई जी ——-> बिलकुल, परिस्थिति तो विकट है की दस साल हो गए हो किसी को बैड पर ओर सेवा करने वाले

भी बेचारे तंग हो जाते है लाईलाज है| चलो किसी के पास पैसा है वो नर्स को रख ले वो इलाज कर ले लेकिन फिर

भी घर के माहोल में तो उदासी छाई रहती है, बच्चो के मन पर भी उसका बुरा असर ओर पत्नी पर तो डायरेक्ट

इफेक्ट होता ही है| इन सबका इलाज है अवश्य क्योंकि ऐसे केस भी राजयोग मेडिटेशन के द्वारा ठीक होते देखे

गए है, फाइनली तो यही चीज है की मनुष्य के पापकर्म उसको शरीर में बांधे हुये है| देखिये ये सब भी चाह रहे

होंगे की हमारे पापा इस देह से मुक्त हो जाए इनकी मृत्यु हो जाए तो ये भी सुखी ओर हम भी सुखी हो जाए

लेकिन मृत्यु पर तो किसी का अधिकार होता नहीं पर हम इसमे कुछ राजयोग के प्रयोग करके, ये जो पापकर्म है

जो इन्हे कष्ट दे रहे है इनको हल्का कर सकते है तो कोई भी जो इनमे से राजयोग का अभ्यास करता हो| 1घंटा

रोज 21दिन तक बहुत पावरफुल मेडिटेशन करेंगे, पावरफुल मेडिटेशन का अर्थ है जहां मेडिटेशन के अलावा,

आत्मा ओर परमात्मा के अलावा ओर कुछ चिंतन ना चले मन बिलकुल एक ही लक्ष्य पर फोकस हो जाए,

परमात्म स्वरूप पर स्थिर हो जाए ओर ये संकल्प करे (ये योग एक अग्नि भी है|) की इस योग की अग्नि से इस

आत्मा के वो विक्रम नष्ट हो जाए जो इनको कष्ट दे रहे है तो निश्चित रूप से ये योग की अग्नि बहुत पावरफुल चीज

है इससे उनके वो विक्रम नष्ट हो जाएंगे ओर दोनों चिजे हो सकती है या तो उनके वो पापकर्म नष्ट होने से आत्मा

देह से मुक्त होकर पुनर्जन्म ले या उनके वो पाप नष्ट हो जाए उनका जीवन सुधर जाए तबीयत सुधर जाए

सबकुछ अच्छा हो जाए ओर फिर से वो अच्छे हो जाए| ऐसे भी बहुत केसेज में हुआ है की बिलकुल बैड पर जो

पेशंट थे जिनके जीने की कोई उम्मीद नहीं थी वो बिलकुल ठीक हो गए| जैसे पीछे भी हमने चर्चा की थी

हीमोग्लोबिन एक का तीन पर पहुंच गया था (विदेश की ये घटना है|) ओर जब राजयोग के अभ्यास किए गए तो

वो व्यक्ति मुश्किल से उसको शायद एक-डेड मास ही लगा होगा ओर बिलकुल वो बाहर आ गया उस चीज से,

अब वो अच्छा जीवन जी रहा है|

 

रूपेश भाई ——-> भ्राता जी आप हमेशा राजयोग की चर्चा करते है की बीमारियों में विशेष करके इसका उपयोग

किया जा सकता है तो राजयोग का जब अभ्यास किया जाता है तो किस प्रकार के शारीरिक परिवर्तन आते है जो

इस प्रकार का स्वास्थ लाभ होता है?

 

सूर्य भाई जी ——-> हां देखिये, बात तो बड़ी गुहय है ओर इसकी गुहयता को उतनी गुहयता से तो इसको ना जाना जा

सकता है ना उसका वर्णन किया जा सकता है पर बात यही होती है की जब राजयोग का अभ्यास करते है तो वो

काली छाया जो मनुष्य के जीवन पर छाई हुई है वो हट जाती है ओर दवाइयाँ काम करने लगती है| एक बहुत

बड़ा प्रभाव होता है वो ये होता है जो आजतक हमने नोट किया की पहले दवाई खा तो रहे थे लेकिन कुछ काम

नहीं कर रही थी लेकिन जब राजयोग के अभ्यास किए तो या तो डाक्टर के समझ में बीमारी आ गयी पकड़ में

आ गयी या उन्होने दवाइयाँ चेंज कर ली की ये नहीं ये दे ओर वो बिलकुल सफल हो गयी| एक तो प्रयोग ये होता

है दूसरा आत्मा क्योंकि उसके साथ बहुत सारे विकर्मो का जंजाल रहता है तो देह से चिपकी रहती है, मन पर

उसके बहुत बुरा असर रहता है तो मन से जो निगेटिव एनेर्जी फैलती है वो देह में फैलकर अनेक रोगो को कहीं

ना कहीं बढ़ाती रहती है जब राजयोग का अभ्यास किया जाता है ना, दूसरा भी कोई करे उसके लिए तो उसके

भी मन से आवरण हट जाता है ओर उसके मन से एक प्योर एनेर्जी का फ्लो पूरी बॉडी में फैलने लगता है ओर

उससे कई बीमारियों में राहत मिलने लगती है|

 

रूपेश भाई ——-> बिलकुल ये एक साइंटिफिक रीज़न है साइंटिफिकली इसका प्रयोग होता है बहुत लोग सोचते है

की ये आस्था का विषय हो गया एक विश्वास का विषय हो गया, चलो हमने भगवान को याद किया ओर हम ठीक

हो गए लेकिन कहीं ना कहीं राजयोग का अभ्यास जो ब्रहमाकुमारिज सीखा रही है वो एक साइंटिफिक है|

 

सूर्य भाई जी ——-> बिलकुल, ये केवल परेर की बात नहीं ये केवल भगवान से कहने या उसकी मदद की या इंतजार

करने की बात नहीं, ये तो मन के वाइब्रेशन्स को चेंज करने की बात है ओर मुझे बहुत अच्छे अनुभव हुये की जो

दवाई काम नहीं कर रही थी राजयोग मेडिटेसन के बाद वो काम करने लगी ओर फायदे होने लगे|

 

रूपेश भाई ——-> बिलकुल, भ्राता जी अगला जो मेल हमारे पास आया है ये आया है अमलनेर महाराष्ट्र से भारती

सोनकर जी लिख रही हैं की मेरे पति बहुत शराब पीते है ओर लगभग सारी कमाई शराब में ही उड़ा देता है जब

वो पीकर आते है तो गाली-गलोच ओर बहुत लड़ाई-झगड़ा भी करते है ओर उससे बच्चो पर बहुत बुरा असर

पडता है, उनकी वजह से बच्चे ठीक से पढ़ भी नहीं पाते ओर मुझे बच्चो के भविष्य को लेकर इस वजह से चिंता

होने लगी है| कृप्या समाधान बताए की क्या मेरे पति का शराब छूट सकता है ओर इस स्थिति में मुझे क्या करना

चाहिए?

 

सूर्य भाई जी ——-> हां देखिये बिलकुल बहुत ही एक करंट प्रॉबलम लोगो की ओर ये कई घरों में हो गई है ऐसी तो

लोग किसी भी टेंशन के वश होकर या किसी बुरे संग में आकर ऐसे व्यसनों के वश होकर अपने जीवन को,

अपने घर को बर्बाद कर लेते हैं| बहुत केसीज तो ऐसे भी हुये की डाक्टर कह रहे  है की तुम्हारा लीवर खराब

होने लगा है अब तुम मर जाओगे जल्दी.. नहीं माना ओर 35 साल की छोटी आयु में लीवर बिल्कुल डैमेज हो गया

ओर मृत्यु हो गयी| तो बहुत बुरी आदत है ये मनुष्य की लेकिन जहां समस्याए है वहाँ समाधान तो अवश्य है तो

इस बहन को मैं कहूँगा की बिलकुल वो निराश ना हो ओर अपने घर में निश्चित रूप से जब वो गाली-गलोच

करेगा तो बुरा माहोल तो बन ही जाएगा, बच्चे भी देखते है, सुनते है उनपर भी बुरा प्रभाव ओर पापा जो उनको

प्यार देना चाहिए वो इंतजार करते होंगे पापा आएंगे ओर अब वो जब देखते हैं तो उन्हे डर भी लगता है ओर ना

जाने क्या-क्या निगेटिव एफेक्ट बच्चो पर बचपन से ही उनके मानस पटल पर अंकित हो जाते है जो उनके भावी

जीवन को पूरी तरह से प्रभावित करते हैं इसलिए इसके समाधान के लिए पहले तो मैं एक बहुत सूक्ष्म जो सब-

कोंसियस माइंड का प्रयोग है वो इस बहन को सिखाना चाहता हूँ ओर जिनके पास भी ये समस्याएं घरों में है वो ये

सब करे, थोड़ा राजयोग मेडीटेसन भी कर ले उसके लिए ओर इससे पहले मैं एक चीज ओर कह दूँ की हमारे

हॉस्पिटलस में होम्योपैथिक डाक्टर्स ने कुछ ऐसे कॉम्बिनेशनस तैयार किए है जो शराब का जो नशा चढ़ता है,

शराब की जो इच्छा होती है उसको समाप्त कर देते है तो शराब पीने की अनइच्छा हो जाती है वो उनसे छूटने

लगती है क्योंकि जो शराबी है वो जब होश में होता है ओर जागृत होता है तो उसको महसूस तो अवश्य होता है

की वो गलत करता है लेकिन वो अपनी आदत के ऐसा पराधीन है की जैसे ही शाम का टाइम होता है फिर वो

उधर को चलने लगता है, दुकान बंद की फिर उधर को चलने लगता है तो वो परवश तो कहीं ना कहीं होता है तो

हमारे डाक्टर्स ने बहुत अच्छे कोम्बिनेसन तैयार किए है ओर बहुत लोगो को इससे लाभ हुआ है| बस इतना ही

की सिर्फ उस व्यक्ति को शराब छोड़ने की इच्छा हो फिर दवाई बाकी पूरा काम कर देती है तो मैं वो

सबकोंसियस माइंड का प्रयोग कह रहा था, अवचेतन मन का प्रयोग, हमारे अन्तर्मन की शक्तियों का प्रयोग तो

इस बहन को क्या करना है ओर जिनके पास भी ये समस्याएं हैं, चाहे ये समस्या है चाहे उनका पति बहुत क्रोध

करता है चाहे उनका पति घर में झगड़ा करता है या ओर कोई समस्या उनके पास है| सवेरे कोई भी एक टाइम

निश्चित करे जब वो व्यक्ति सोया हो, फॉर एक्जाम्पल सवेरे 5बजे कर ले 6बजे कर ले जब वो सोया हो क्योंकि जब

वो व्यक्ति सोया है तब उसका सब-कोंसियस माइंड फुल जागृत है वो एक्टिव है ओर तब हम उसके

सबकोंसियस माइंड को जो थोट्स भेजेंगे वो उन्हे रिसिव करेगा अक्सेप्ट करेगा| तो मैं उदाहरण दे रहा हूँ 5बजे

का एक टाइम निश्चित करके 5मिनट राजयोग मेडिटेसन करे ओर उसे आत्मा देखकर की वो यहाँ मस्तक में

चमकती हुई ज्योति है, वो एक मनुष्य है ये नहीं, वो एक आत्मा है भगवान की संतान है वो भी मूल रूप से पवित्र

है, बहुत शुद्ध है वो भी कभी बहुत अच्छी आत्मा थी अब इस व्यसन के वश हो गयी है| अब क्या करेंगे 5मिनट

मेडिटेसन के बाद उसे आत्मा देखते हुये माइंड टु माइंड उसे कुछ थोट्स देंगे यानि मन से उससे बात करेंगे ओर

कैसे करेंगे “ये नहीं की तुम शराबी हो तुम तो खराब हो तुम बड़े गंदे हो तुम कभी नहीं सुधरोगे ये नहीं” तुम बहुत

अच्छी आत्मा हो तुम देवकुल के हो तुम तो भगवान की संतान हो अरे अपने को पहचानो, ये शराब तो राक्षसो की

चीज है तुम तो देवकुल के हो तुम ये राक्षसो की चीज कैसे स्वीकार करने लगे तुम बहुत अच्छे हो तुम तो बहुत

अच्छे हो तुम तो पवित्र हो अब इसे छोड़ दो| बस, रोज यही विचार उसको देंगे तो देखेंगे 2-4 दिन के बाद उसका

सब-कोंसियस माइंड इन्हे बिलकुल तेजी से ग्रहण करने लगा ओर जब वो उठता है तो उसके मन में यही विचार

होंगे अरे मैं बहुत अच्छा इंसान मैं राक्षसी प्रवृति के अधीन कैसे हो गया मुझे ये छोड़ देना चाहिए ओर अगर

21दिन ये कर लिया जाए लगातार तो आइ एम स्योर वो व्यक्ति शराब से मुक्त हो जाएगा| कोई क्रोधी है उसपर

भी कर सकते है कोई झगड़ालू है उसपर भी कर सकते है तो ये एक बहुत सुंदर तरीका है|

 

रूपेश भाई ——-> तो भ्राता जी सुबह उठ करके विशेष करके अभ्यास करे सारे दिन में भी क्या कुछ इसी तरह

के अभ्यास..

 

सूर्य भी जी ——-> एक अगर उसके मन में ये भावना बैठ गई की ये तो सुधरेगा नहीं या ये हो गया पता नहीं शराब

छूटेगी या नहीं, पता नहीं अब हमारे घर का क्या होगा, पता नहीं हमारे बच्चो का क्या होगा.. ये निगेटिव विचार

कहीं ना कहीं उसकी इस आदत को प्रबल करेंगे लेकिन विचार ही ये रखे की नहीं, ये बहुत अच्छा इंसान है

इसकी आदत छूट जाएगी, आखिर वो जल्दी इससे मुक्त हो जाएगा ये सुंदर विचार इसके वाइब्रेशन्स उसको

जाएंगे ओर उसके मन में भी  कहीं ना कहीं एसी सुंदर प्रेरणाओं को जागृत करेगी|

 

रूपेश भाई ——-> बिलकुल, वैसे भी कहा जाता है की संकल्प दूसरों तक अवशय पहुँचते ही है हम जो सोच रहे है

दूसरों के मन में भी वो प्रभाव डालता ही है तो रोज सुबह उठ करके जब वो सोये हैं तब ये अभ्यास करे ओर सारे

दिन भी ये जैसे आपने कहा बहुत ही सुंदर श्रेष्ठ सकारात्मक विचार रखे तब ये सुधरेंगे|

 

सूर्य भाई जी ——-> हाँ एक ओर बहुत अच्छी चीज की जा सकती है की जैसे ही सवेरे उठे तो एक विजन भी बना ले,

एक चित्र देखे की मेरा जो पति है अब वो शाम को घर में आ रहा है मुस्कुराता हुआ, बच्चो को प्यार देता हुआ,

बच्चे गले मिल रहे है, घर का माहोल बहुत सुंदर हो गया है बस ये काम 15दिन में ही होने जा रहा है अब वो आ

रहा है घर में, एक सुंदर विजन इस विजन का इफेक्ट भी बहुत अच्छा होगा|

 

रूपेश भाई ——-> जी जी बहुत सुंदर भ्राता जी, ये विजन जो आपने दिया उससे अभी इतनी खुशी हो रही है तो निश्चित

रूप से जब ये साकार होगा तो कितनी खुशी होगी ओर इस बहन की जो घर की समस्या है, ना केवल इनकी

भ्राता जी बल्कि मैं तो कहूँगा की बहुतों के घर की ये समस्या है, बहुत सारे लोग इसका सामना कर रहे हैं तो सभी

यदि इसका प्रयोग करते हैं तो उनका जीवन उनका घर स्वर्ग बन जाएगा| भ्राता जी आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

मित्रो बहुत सारी समस्याए जीवन में है लेकिन कहा है किसी ने की समस्याए भी बेहतरीन लोगो के पास ही आती

हैं क्योंकि बेहतरीन लोग ही उसे बेहतरीन ढंग से अंजाम दे सकते है तो यदि समस्याए आई है तो घबराने की बात

नहीं है उनका समाधान है| जैसे कहा जाता है की संसार में कोई भी ऐसा ताला नहीं है जिसकी चाबी नहीं हो, यदि

ताला है तो चाबी भी अवश्य होगी| आवश्यकता है संयम बनाए रखने की ओर प्रकाश की ओर देखने की जो इस

कार्यकर्म के माध्यम से हम लगातार आपको दे रहे हैं| आप हमेशा की तरह हमारे साथ बने रहे, आपका प्यार

हम पर यूंही बरसता रहे क्योंकि आपका प्यार आपके प्रश्न आपकी समस्याए उनके निदान के लिए ही विशेष रूप

से ये कार्यकर्म निर्मित किया गया है तो आज के समाधान कार्यकर्म में इतना ही, दीजिये इजाजत अपने मित्र को|

नमस्कार !

 

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