Samadhan Episode – 000789 Experience Sharing

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ये एपिसोड के मेहमान है पुणे से पधारे ज्ञानेश्वर जी और उनकी युगल भक्ति जी।

भक्ति जी रुपेश जी की इस बात से सहमत है कि भक्ति और ज्ञान का जीवन मे

अगर मेल हो जाये तो जीवन अत्यन्त आनंदमय होगा । भक्ति में प्यार, आराधना

और निरपेक्षता का होना अत्यन्त अवश्यक है। ज्ञानेश्वर जी का कहना है कि भक्ति

और ज्ञान में बहुत फर्क है।

भक्ति का मतलब निजी अनुभव से है। अपना अनुभव अगर हम दूसरों को भी

करा सकते है, यह ज्ञान हुआ। भक्ति जी का कहना है कि भक्ति सिर्फ भगवान

से कुछ माँगने का ज़रिया नही है। भक्ति अक्सर लोग इसलिए करते है, ताकि

वो अपने अंदर के खालीपन को दूर कर पाए। पर सही मायनों मे भक्ति

इसलिए होनी चहिये ताकि आप भगवान के प्रति अपना स्नेह – आदर उनके

सामने बयान कर पाए। ज्ञानेश्वर जी का कहना है कि ज्ञान, परम ज्ञान या

सत्यज्ञान भक्ति के बिना अधूरा है। हमरा सफर “God-fearing person” से

“God-loving person” बनने का होना चहिये। चाहे भक्ति हो या ज्ञान हो,

जब हम उन अच्छी बातों को अपने जीवन में धारण करेंगे, तब ही हम ईश्वर के

नजदीक पहुंच पाएंगे। दोनों का यह भी मानना है कि अगर हम पहले से ही

किसी गुरु के पास जाते है और उनके बताये मार्ग पर चलते है, इसका मतलब

यह नहीं कि हमें अपने तरक्की केलिए दूसरे गुरु के पास जाने से अपने आप

को रोकना है। और इसका मतलब यह भी नहीं की पहले गुरु केलिए हमारा स्नेह

सम्मान ख़तम हो गया है। जैसे स्कूल में अलग क्लास चेंज करते अलग टीचर्स

होता है, वैसे जीवन में भी हमे अपने तरक्की केलिए श्रेष्ठ गुरुओ के ज्ञान को

अपनाने से रोकना नहीं चाहिए। भक्ति जी ने पानी को अभिमंत्रित करके पीने

का प्रयोग करके 21 दिन में अपने घुटने का दर्द पूरी तरह से ठीक किया था ।

इस बात का उनको बेहद हर्ष है। इस प्रयोग का शास्त्रों में और साइंटिफिक

स्टडी में भी सबूत है। समाधान कार्यक्रम के माध्यम से पति, पत्नी दोनों सबको

यही सन्देश देना चाहते है की ज्ञान को सीखके और जीवन में अपनाके इसका

पूरा फायदा ज़रूर लेना है।

ॐ शांति।

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