Samadhan Episode – 0004 Children’s Problems

CONTENTS :

रुपेश  जी –    पिछली बार  जो बात आपने हम सब के सम्मुख रखी थी कि  राजयोग का अभ्यास व्यसनों को ना केवल हमसे  दूर कर देता है बल्कि हमें एक महानता की  ओर ले चलता है  तो राजयोग के बारे  में मेरी भी जिज्ञासा  है  और मुझे भी लगता है कि हमारे दर्शकों  की भी जिज्ञासा बड़ी होगी, तो राजयोग के बारे में थोड़ा ओर विस्तार से हमें जानकारी दें !

भ्राता सूरज जी –  देखिये राजयोग में सबसे पहले अपने को आत्मा जान कर अपने को इस देह से डिटैच करना है  यानिकि, देह से बिलकुल अलग।  लोग प्राणायाम में या अनेक आसनों  का अभ्यास करते हुए , शिथिलीकरण रिलेक्ससेशन  का अभ्यास कराते है कई योगों में मनुष्य ऐसे भी कराते है कि  अपने मन को पूरी तरह शांत कर दो , वो भी एक अच्छी पद्धति है सभी विचारों को समाप्त करके अपने विचारों को शांत कर दो।  इन सभी चीज़ों का समावेश हो जाता है इस सोल कोंसियस स्थिति में , कि मैं  चैतन्य आत्मा हूँ,  दोनों भृकुटियों  के बीच विराजमान हूँ , न केवल यहाँ ध्यान एकाग्र करना है लेकिन ,अपने आत्मिक स्वरुप को जान कर विवेकयुक्त होकर अपने स्वरुप का दर्शन  करना है आत्मा निराकार है उसके स्वरुप पर मन बुद्धि को स्थिर करना है, इससे न केवल हम इस देह से डिटैच हो जाते हैं और बिलकुल सिम्पल सी फिलॉसोफी है के मनुष्य जितना इस देह से डिटैच होगा उतना इन बुराईयों  से स्वतः ही डिटैच हो जायेगा चाहे वह व्यसनों की बुराई हो या काम क्रोध की  बुराई हो, चाहे झूठ बोलना ,धोखा  देना, चोरी करना जो समाज में आजकल एक सभ्यता का प्रतीक बन गया है जो भी बुराईयाँ हो उन से मनुष्य डिटैच हो जाता है मुक्त हो जाता है।  दूसरी चीज़ राजयोग में हम अपना कनेक्शन अपने परमपिता से जोड़ते है जो सचमुच हमरा पिता है हमारा है केवल भगवान नहीं  केवल महाज्योति नहीं , जिस पर हमें ध्यान लगाना है, परन्तु उससे हमें एक नाता जोड़ना है  एक रिलेशनशिप कायम करनी है वो मेरा परम पिता है परम शिक्षक भी है  परम सतगुरु  भी है भी  है , मेरा सच्चा मित्र भी है सखा भी है मेरा प्रियतम भी है ये नाता है हमारा उससे।

रुपेश जी –    जो हम जन्म जन्म से गाते आये  " त्वमेव बंधु  च सखा  त्वमेव ..  "

भ्राता सूरज जी — –    बहुत  सारे  भक्तों  ने भी कुछ कुछ नाते भगवान  से जोड़े  किसी ने उसको अपना परम सतगुरु माना , किसी ने सखा भी माना,  किसी ने उसको प्रियतम के रूप में भी माना, कई  ने उससे खुदा दोस्त का नाता भी जोड़ा।  तो ये नाते हमें उससे जोड़ने होते हैं। इस नाते में बहुत प्यार भर जाता है  हमारा उससे प्यार तो उसका हमसे प्यार हो जाता है  क्योँकि वो तो हमारा परमपिता है परन्तु हम उससे दूर हो गयें है  तो उसका प्यार है तो सब संतानो के लिए , लेकिन  कोई उसे महसूस नहीं करता है  तो ये नाता जोड़ने से हमारा प्यार उसके प्यार को आकर्षित   करने  लगता है  फिर हम उससे अपनी बुद्धि का नेत्र जोड़ देते हैं बुद्धि जो प्रज्ञा  हमारी है जो स्थित हो जाती है स्थिर  हो जाती है और हम उसके स्वरुप पर बुद्धि को स्थिर कर देतें है  तो उसकी सम्पूंर्ण  शक्तियों , सम्पूर्ण शांति, पवित्रता , प्रेम, उसका सुख हमारी ओर प्रवाहित होने लगता है तो हमारा बढ़ने लगता है  और इस तरह  जब हमारी स्थिति बढ़ने लगती है  आत्मा की स्थिति भी बढ़ती है। सरल शब्दों में कहेंगे बुद्धि का विकास होता है,  मन सशक्त बनता है,  मन निर्विकारी बनता है,  मन बहुत स्वच्छ होने लगता है, बुद्धि भी बहुत शक्तिशाली दिव्य सूक्ष्म  स्वच्छ  होने लगती है तो इस तरह राजयोग से मनुष्य व्यसनों से मुक्त हो जाता है , मनोबल बढ़ने से वो सहज ही इन चीज़ों को छोड़ पाने में सक्षम होता है।  जैसे हमने उदाहरण दिए , हमारे यहाँ करोड़ों लोग व्यसनों से मुक्त हो चुके हैं और इनका कभी ना सेवन करने की दृढ़ प्रतिज्ञा कर चुके हैं और ये केवल कहने की बात नहीं है ये परम  सत्य है बहुत सारे  शहरों में ऐसे  प्रसिद्ध लोग थे जो मधपान के लिए प्रसिद्ध थे , जो अपने गलत आचरण के लिए पूरे शहर में प्रसिद्ध  थे, जिनका आतंक  था पूरे  शहर में और वो बहुत अच्छे पुरुष बन गए है जेंटलमेन बन गए वे इन व्यसनों को छोड़ कर एक बहुत सदाचारी व्यक्तित्व के धनी बन गए और इससे सारे समाज में सारे उस शहर में बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा कि देखो ब्रह्माकुमारियाँ अगर ऐसे व्यक्ति को बदल सकती हैं तो वो सचमुच संसार को स्वर्ग भी बना देंगी।  तो आइये हम थोड़ी देर के लिए राजयोग का एक प्रैक्टिकल अभ्यास कर लें ताकि हम एक सुन्दर अनुभूति इसी समय कर सकें — — बिलकुल सीधे रिलैक्स बैठ जाए और संकल्प करें, "मैं ये स्थूल नश्वर देह नहीं हूँ इससे  भिन्न एक चैतन्य आत्मा हूँ, मैं अति सूक्ष्म हूँ ,मैं अपने को इन चरम  चक्षुओं से भी नहीं देख सकती अब मेरे पास ज्ञान का, सद् विवेक का दिव्य चक्षु प्राप्त हुआ  है मैं उस दिव्य नेत्र से उस स्वरुप को  देखूं , करें स्थिर अपनी बुद्धि के नेत्र को अपने स्वरुप पर, मैं ज्योति , बहुत सूक्ष्म , प्रकाशमान ,शांत स्वरुप हूँ , प्रेम स्वरुप, सुख स्वरुप, स्वीकार करते चलें , मैं  पवित्र हूँ , मैं  शक्ति स्वरुप हूँ, मैं  आनंद स्वरुप हूँ , मैं  इस देह से न्यारी हूँ , मुझ से चारों ओर रंग बिरंगा प्रकाश फैल रहा है , में शांत स्वरुप हूँ बिलकुल शांत , चलें डीप साइलेंस की ओर मन शांत अपने स्वरुप को निहारते हुए , महसूस करें मैं  आत्मा इस देह को यही छोड़ कर उड़ चली अपने धाम ,परमधाम , सूर्य चाँद तारों के भी परे , आत्माओं की दुनिया जिसे निर्वाणधाम , शांतिधाम , मुक्तिधाम भी कहते हैं , इस संसार में आने से पूर्व हम यही थे मुक्त थे , परमानन्द में थे , डीप साइलेंस में थे ,परमधाम चारों ओर फैला हुआ  लाल गोल्डन  लाल  प्रकाश , सबसे ऊपर  महाज्योति सुप्रीम सोल निराकार , ऑलमाइटी शांति के सागर, ज्ञानसूर्य परमात्मा चमक रहें हैं देखें अपने तीसरे नेत्र से विसुअलाइज़ करें महाज्योति को , उनसे चारों ओर अनंत रंग बिरंगी किरणें फैल रही हैं वो भी सूक्ष्म ते अति सूक्ष्म इन आँखों से न देखने योग्य , मुक्तिदाता, वे  सर्व के  उनसे चारों ओर ये दिव्य प्रकाश फैल रहा है अब ये उनका प्रकाश उनसे फैलती हुई दिव्य शांति सर्व श्रेष्ठ पवित्रता और शक्तियाँ ये सब वाइब्रेशन के रूप में नीचे आ रही हैं एक फाउंटेन के रूप में मुझ पर पड़  रही हैं परमात्म शक्तियाँ मुझमें   समा रही हैं विसुअलाइज करे अनुभव करें शांति की किरणें मुझमें  समा  रही हैं , परमात्म पवित्रता मुझमें प्रवेश हों रही हैं सर्वशक्तिमान की शक्तियाँ मुझको प्राप्त हो रही हैं सुखद फीलिंग — -चित्त शांत और एकाग्र  बस इसी में कुछ क्षणों  तक स्थिर रहें , यह हुआ राजयोग  का संक्षिप्त अभ्यास , इसको आप एक मिनट में कर सकतें हैं  फिर 5 मिनट फिर 10 मिनट अभ्यास कर सकते हैं लम्बा समय इससे चित्त  शांत होगा तनाव समाप्त हो जायेंगें , डिप्रेशन समाप्त हो जायेगा, बुरी आदतें आपको छोड़ जाएँगी  और आपके अंदर छुपा देवत्व जागृत होने लगेगा , सद्गुणों और शक्तियों से आप अपने को श्रृंगारित मेहसूस  करने लगेंगे  और धीरे धीरे मेहसूस होने लगेगा परमात्मा से अपनापन  , जब आप उसकी ओर  निहारेंगे तो  लगेगा वो तो अपना है मेरा बाबा है और ये प्यारा बाबा , मेरा  बाबा चित्त को महान बनाएगा। आप परमात्म समीपता का अनुभव करेंगे।

इस  अभ्यास के बाद आवाज़ में आने की इच्छा नहीं होती  वैसे ही ये खाने पीने की इच्छा नहीं होगी जो गलत चीज़ें हैं , भोजन खाने  की इच्छा तो होगी , कर्मेन्द्रियों का रस छूट जायेगा  और सचमुच ये जीवन को आनंदित करने वाला राजयोग है।

रुपेश जी — —   सर्वे (survey) ये कहता है भ्राता जी कि  जो लोग व्यसन छोड़ते हैं छोड़ने के पश्चात् 80 -90 % लोग फिर से व्यसन की ओर वापिस लौट जाते हैं. मुझे लगता है कि राजयोग इतना मन को सम्बल प्रदान करेगा , शक्ति प्रदान करेगा , कर्मेन्द्रियों को इतना नियंत्रण प्रदान करेगा कि  वह पुनः उस व्यसन की ओर कभी भी न बढ़े।

भ्राता सूरज जी — –  बिलकुल, जैसे  हमारे अनुभव हुए हमारे  यहाँ आने वाले लोगों, मैं ये तो नहीं कहूँगा सेंट % पर में ये अवश्य कहूँगा के 95 % लोग ऐसे हैं जिन्होंने एक बार जो व्यसन छोड़ा दिया दुबारा उसको टच नहीं किया 5 % भी ज्यादा हों एक दो % लोग मिलेंगे किसी कारणवश जो किसी बुरे संग में आकर बुरी संगति में बहकर फिर से व्यसनों का सेवन करने लगे हैं अन्यथा ये सब छूट जाता हैं क्योंकि इससे मनोबल बहुत बढ़ जाता है।

देश के युवकों के लिए :

भ्राता सूरज जी — -मैं अपने देश के युवकों के लिए ये कहूँ, तो ये सुन्दर सन्देश मैं अपने सभी युवकों को देना चाहता हूँ — — — — — — — — — —

प्यारे युवकों आप सभी विशेषकर हमारे देश की  शान हो, मुझे याद आ रहा है जब महात्मा गांधी जी ने देश को स्वतंत्र करने का आंदोलन प्रारम्भ किया था तब युवको का आह्वान किया था और बहुत सारे युवक जो एडवोकेट थे जुडिशियल फिल्ड  में कार्यरत थे अपना सब कुछ त्याग कर कूद पड़े थे महात्मा गांधी जी को साथ देने के लिए , उसमें आप जानते हैं पंडित जवाहरलाल नेहरू , सरदार वल्लभ भाई पटेल और ऐसे बहुत सारे वकील थे क्योंकि  इन्हे कानून का ज्ञान था, फिल्ड में रहते थे तो सशक्त थे।  मैं अपनी युवा साथियों को कहूँगा अब भगवान  आपका आह्वान कर रहा है आपको पता नहीं है अब भगवान को संसार को बदलने के लिए ,इस संसार को व्यसनमुक्त बनाने के लिए , इस संसार को रोगमुक्त , शोक , भ्रष्टाचार , तनाव , ये सब कुछ जो चल रहा है ये बीमारियां , जो एक बुरी गति की ओर हमारा संसार चल रहा है इसको बदलने के लिए  इसको स्वर्गमय दुनिया बनाने के लिए , युग बदलने के लिए भगवान को आप सब युवको की बहुत आवश्कता है यद्धपि ये काम बड़े बुजुर्ग भी कर सकते हैं , पर भगवान आप सब युवकों का आह्वान कर रहा है –मेरे बच्चो आ जाओ , पवित्र जीवन बनाकर निर्व्यसनी जीवन बना कर , निर्विकारी जीवन बनाकर , मेरे को मदद करो  संसार को पुनः स्वर्ग बनाने में,  तो मेरे साथियों , युवको , कन्याओं , बालकों  मैं आप सबको कहूँगा अपने भाग्य पर गर्व करो भगवान को तुम्हारी आवश्कता है वो तुम्हारा आह्वान कर रहा है और सोचो यदि तुम भगवान के काम आ गए तो ये कितनी बड़ी बात हो जाएगी।  जो लोग महात्मा गांधी के साथी बने थे मंत्री बन गए , आज तक भी उनमे जो  जीवित है तो उसको स्वतंत्रता सेनानी मान कर सरकार भी पेंसन देती है उनका ध्यान रखते हैं समाज में भी उनका सम्मान  होता है और अगर तुम भगवान को साथ देंगें तो सोचो वो तुम्हे क्या देगा ,संसार में तुम्हें चमका देगा।  तो प्यारे साथियों , प्यारे युवकों  जिन राहों में संसार के अनेक युवक चल रहें हैं,  वेस्टर्न कल्चर में, विषय विकारों में बहते जा रहे हैं , जो अपने स्वमान और अभिमान को खो कर दलदल में फंसते जा रहे हैं, आप उससे बाहर निकल जाओ और भगवान की आवाज़  सुनो , उसके काम आ जाओ , तो आपके जीवन पर संसार गर्व करेगा , समाज गर्व करेगा और आपको जन्म देकर आपके मातपिता भी बहुत गर्वान्वित होंगे। तो मैं कहूँगा अपने युवक साथियों को व्यसनों के इस गंदे नाले में आपको नहीं जाना है ,आपको तो पवित्रता का स्वच्छ मार्ग अपनाना है और इस संसार को स्वर्ग बनाने में भगवान को साथ देना है।  ये मेरा अपने युवा साथियों से अपने प्यारे बच्चों से, कन्याओ से सन्देश है उनसे एक रिक्वेस्ट भी है के आप सभी भगवान के समीप पहुँचे सत्य ज्ञान लें और उसके श्रेष्ठ  कार्य में सहभागी बने।

— –बस मैं तो यही कहना  चाहूंगा कि युवको को एक प्रोपर गाइडेन्स की जरूरत है ,उनकी शक्तियों को चैनलाईज़ करने  की जरुरत है, रूपांतरित करने की जरुरत है।  वो बड़े बड़े कार्य करने मै सक्षम है और सही गाइडेन्स ब्रह्माकुमारीज़  दे रही है   हमारे यहाँ ब्रह्माकुमारी बहने ही कितनी  युवक हैं  हमारे पास लगभग सोलह हज़ार बहने है उनमें से मैं कहूँगा 14000  तो कन्याये ही हैं जो बिलकुल युवक हैं जो बहुत एनर्जेटिक हैं जिन्हीने पवित्रता का मार्ग अपना कर  संसार को माया को ,पांच विकारों को चैलेंज कर दिया और  विजयी बनती जा  रही हैं।  उन्ही को फॉलो करके सभी  युवक एक श्रेष्ठ मार्ग अपनाकर , इस श्रेष्ठ पथ के राही बन सकते है। — — —

रुपेश जी — — – बिलकुल और भ्राता जी कहा भी जाता है " नर ,नारी ,बूढ़े   और बालक सबका तू ही सहारा है उठो युवकों अब कुछ कर दिखलावो, अब वक्त ने तुम्हें पुकारा है, देश ने तुमको पुकारा है"  आपका सन्देश भी इस मंच के माध्यम से उन तक पहुंचा है तो भ्राता जी आपने जो सन्देश दिया उसके लिए आपका बहुत बहुत  धन्यवाद।  युवा साथियों एक सन्देश आपके पास इस रूप में पहुंचा है की सचमुच समय हमसे कुछ चाहता है, देश हमसे कुछ चाहता है मातृ भूमि हमारी ओर देख रही है और मैं तो यही कहूँगा कि  " काजल की काली कोठरी में अपना दामन  बचाया जा सकता है ,काँटों से लड़कर फूलों को पाया जा सकता है और अगर इरादे बुलंद हों तो सहज इन  व्यसनों से मुक्त हुआ जा सकता है एक स्वर्णिम भारत का निर्माण किया जा सकता है " तो एक पूरा ही देश , एक पूरा समाज आपकी ओर देख रहा है अब निर्णय आपके हाथों में है कि किस ओर  अग्रसर होना चाहिये।  सचमुच एक इतिहास बनाने का समय है तो युवा साथियों आओ हम सब मिलकर इतिहास बनाये , व्यसनों से मुक्त हों और एक स्वर्णिम प्रभात की ओर बढ़े।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Like us on Facebook
error: Content is protected !!
Home